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माँ से रिश्ता है अनूठा
1. बिन कहे हर बात समझती~ सुहानी राय बिन कहे हर बात समझतीजीवन में रंग भर जाती माँ!दर्शाती है रोष कभी तोकभी अनुराग लुटाती माँ!आषाढ़ की तपती दोपहरी में,शीतल छांव बन जाती माँ!बंजर वसुधा के ऊपर भी,मेघ फुहार बरसाती माँ!डूबते हुए सागर में भी,आशा की पतवार बन जाती माँ!सारी दुनिया से लड़कर,हालातों को बदल देती…