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सपनो का संसार
खुले गॉव को छोड करआया था शहर, करने व्यापारतंग गलियो मे सिमट गया, सपनो का संसार काम-धन्धा सब चौपट हुआछुट गया घर बार जब से फैला है महामारी का प्रसार रातो मे अब नीद ना आती गॉव कि चिन्ता मूझे सताती कैसे होगें मॉ बाप अब आस लगा रखी है सरकार से मदद मिल जाये…