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सस्ती शराब
शराब ने न जाने कितने घर बर्बाद किए हैं, इससे दूरी रखने में ही भलाई है। कलमकार विकास बागी इस कविता में एक महिला की दास्तान बता रहे हैं। मेरा पति शराब पीता था कोई गम न था, वो रोज घर आता था ये भी कुछ कम न था। अब वो किसी चौराहे पे सस्ते…