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हंस रही थी जिंदगी
कोरोना से जीतने के लिए शीला झाला ‘अविशा’ का संदेश इस कविता में पढ़ें। हंस रही थी जिंदगी आंगन और गलियों में खिल रहे थे फूल नवयौवन से बगिया की कलियों मे आ गया पिशाच अकस्मात जिसका नाम था कोरोना निवेदन है आपसे आप लापरवाही करो ना निबोध जीवों की पीड़ा आज समझ है आई…