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मजदूर का जीवन
किसी भी बोझ से न थकता हूं वक्त की चोट से न रुकता हूं बस दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी करता हूं मैं । सपनों के आसमान में बिना गाड़ी बंगले के आराम में अपने कच्चे मकान में जीवन जीता हूं मैं । फटे पुराने लिबास पहने कंधो पर जिम्मेदारी ढोने किस्मत का…