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तुम दुःख मेरे नाम करो
कलमकार विजय कनौजिया कहते हैं कि तुम दुःख मेरे नाम करो। प्रेम में कभी दुख न देना, वहाँ केवल खुशियों का आशियाना होना चाहिए। दुख आएँ भी तो मिल बाटकर उन्हें गायब कर देना चाहिए। प्रथम प्रेम का प्रथम निवेदन तुम मेरा स्वीकार करो पूरी हो मेरी अभिलाषा बस थोड़ा उपकार करो..।। मेरी चाहत के…