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रात सोचते गुजरेगी
कलमकार आनन्द सिंह की कविता “रात सोचते गुजरेगी” पढिए। आपने भी रातों में सोने के बजाय सोचने का काम किया होगा और नींद कोसो दूर खड़ी होकर आप ही को निहारती रही होगी। ना जाने क्यों यूं मध्यनिशा में नींद मेरी उर जाती है भविष्य की चिंता हर बार क्यों विचलित सी कर जाती है…