Tag: SWARACHIT739

  • तुझमें हैं-तुझमें हैं

    तुझमें हैं-तुझमें हैं

    हमारे भीतर अच्छाई और बुराई दोनों ही रहती है, अंदर की ऊर्जा का सदुपयोग कर हम कर्तव्यवान बन सकते हैं। कलमकार हिमांशु बड़ोनी हम सबका मनोबल बढ़ाती हुई कुछ पंक्तियाँ इस कविता मे लिखीं हैं, आप भी पढ़ें। तुझमें हैं – तुझमें हैं, बापू के प्यारे दुलारे,तीन बन्दर तुझमें हैं!गहरी पीर चीरने वाले,सात समन्दर तुझमें…