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  • छलक के बोतल, दो बूंद गिरा

    छलक के बोतल, दो बूंद गिरा

    आओ मिलकर करें तज़किराहे! कहां मिला, पीने को मदिरा? जल बहुत पिएऔर ऊब गएबिना सांझ केदिनकर डूब गएजब खुलेकोई मधुशालातभी जमेगीदिल का प्याला छलक के बोतल, दो बूंद गिराहे! कहां मिला, पीने को मदिरा? एकांतवास सेसूख गएबिन दारू के सबभूख गएबन्दी जैसनजीवन बनामुर्गा दारू कानहीं ठना किया है ठेका, खूब मुजाहिराहे! कहां मिला, पीने को…