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  • माँ के बिना जहां का कोई अस्तित्व नहीं

    आधा निवाला खुद खा आधा मुझे खिलाती थी।अपने रक्त की बूँद-बूँद से वो मुझे सींचती थी।। ख्वाहिशें उन्होने अपनी सारी जलाई ।जब मैं उनकी कोख से गोद में आई।। कोई ना देखे मुझे बुरी नजर से इस बात की वो फिक्र करती।धीरे-धीरे मैं बड़ी हो रही हूँ इस बात का वो जिक्र करती।। अँगुली पकड़…