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परम्पराओं की संवाहक माँ
रीति-रिवाजों और परम्पराओं की संवाहक माँ,घर एक संस्था तो इस संस्था की संचालक माँ।ऊंच-नीच, भेदभाव रहित, सबको ही मिले और बराबर,आशा और विश्वास की केंद्र, ऐसी एक अभिभावक माँ। माँ का साथ तो रीति-रिवाज़ और परम्पराएं हैं,गर साथ नही तो सब भूली-बिसरी यादें हैं।धर्म-कर्म और रिवाजों को पीढ़ियों तक संचारित करती,परम्पराओं को जिन्दा रखने की…