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मातृ शक्तियों को शत शत नमन
जिस देवी ने है मुझे लिखा, उस पर मैं क्या लिख सकता हूँजिस देवी से सीखा पढ़ना, उस को कितना पढ़ सकता हूँजब आँख खुली तो माँ ही थी, उसकी साँसों से जन्मा था बस उसको ही समझा था मैंने, बाकी सब कुछ तो भ्रम सा था हर पाठ पढ़ाया जीवन का, जिंदगी का मतलब…