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  • अब कहाँ

    अब कहाँ

    कवि हर एक स्मरण से कविता की रचना कर सकते हैं। यादों ने तो न जाने कितनी कविताएँ लिखवाईं हैं। कलमकार प्रीतम भी उन दिनों को याद कर कहते हैं कि ऐसा अब कहाँ? वो कॉलेज का आँगन वो साथी वो मस्ती अब कहाँ अब कहाँ वो लेट लतीफी वो अय्यासी वो नजरें चुरा कर…