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मजबूरी मजदूरों की
हाय! कैसी है ये, मजबूरी मजदूरों की। अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए चले जाते है,परिवार से दूर ताकी कही मजदूरी कर, पाल सके, परिवारों का पेट। हाय! कैसी है? ये पेट की आग। जो मजदूरों को कर देती,अपनों से दूर। हाय! यही चार रोटी है, जिसके लिए आए थे, घर छोड़…….!! आज यही…