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  • लम्हा 

    लम्हा 

    ठहर थोड़ा अभी और तूँ सब्र रख चमन होगा गुलजार फिर इत्मिनान रख। नाव भले ही फँस गयी मझधार में जिन्दा रहेगा बस अपना खयाल रख । बेशक कैद सी हो गयी जिन्दगी इश्क का इम्तिहां है खुद पर यकीं रख। शिकारी खड़ा बाहर कदम कदम पर आगोश में जकड़ लेगा दरवाजा बंद रख। जीया…