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पेट पालने की मजबूरी
औरंगाबाद ट्रेन हादसे में मारे गए सभी मज़दूर भाइयों को भावभीनी श्रद्धांजलि…. गाँव मे नहीं था रोजगार का कोई भी साधन,चला गया था दूर शहर मैं लेकर अपने प्रियजन।दिन भर मजदूरी करता था पैसे चार कमाता था,हर शाम थक हार कर मैं रूखा सूखा ही खाता था।घर पर मेरी पत्नी बूढ़ी माँ का ख्याल रखा…