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  • मैं मजदूर की बेटी हूँ

    मैं मजदूर की बेटी हूँ

    आओ दोस्तों मजदूरोंकी दास्तां सुनाती हूँ।दूसरों की छोड़ो मैं खुदमजदूर पिता की बेटी हूँ। ज़िन्दगी के हर उतर चढ़ावको मैंने आँखों से देखा है।भूख से अपनी माँ को पेट मेंगमछा बांधते देखा है। एक-एक रूपये कमाने कादर्द मैं अच्छे से जानती हूँ।आज भी 5रूपये बचाने कोमैं रोज पैदल पढ़ने जाती हूँ। चाँदी को पिघलाने मेंसाँस…