कोरोना का रोना रोते इंसानों के आँखों से बहते आँसू कह जाते हालातों को बिन बोले। तपती धूप में प्यासे कंठ लिए पाँवों में छाले लिए घर जाने की आस लिए भूखे प्यासे राहगीर चलते जाते मन से जलते जाते? सेवाभावी लोगों से मिल जाती दो जून की रोटियाँ। फिक्र का बोझ उठाए कर्ज की…