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कातिल इश्क
कलमकार प्रिंस कचेर “साक्ष” इश़्क को कातिल संबोधित करते हुए कुछ पंक्तियाँ लिखते हैं। तुम भी खामोश हो, मैं भी खामोश हूं फासले ही बचे, दोनों के दरमियां झूठे वादे किए,झूठी कसमें देिये क्यों बढ़ाई थी तुमने, यह नज़दीकियां मै तो गैर था, ना किसी से बैर था तेरे शहर से पूरा मैं अंजान था…