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मजदूर के विचार
अपने अंतःकरण में जिज्ञासाओं का बोझ लिए हुए मैं चले जा रहा हूं खुद में खुद की सोच लिए हुए महामारी के दरमियां जीने की सारी उम्मीदें खोकर मैं खुद के आंसू पोछने लगा, अपनी आंखों से रोकर जब सोच रहा था मैं कि मेरा जन्म ही क्यों हुआ तभी मेरी पीठ पर सवार मेरी…