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बालिका हूँ
आज जब हम बालक-बालिका में समानता की बात करते हैं तो क्या यह अपवाद होता है। कलमकारों को इस विषय पर लिखना ही पड़ता है। हम सभी समाज का हिस्सा हैं, आइए एक बेहतर कल के निर्माण की ओर अग्रसर हों। कलमकार मुकेश बिस्सा की यह कविता पढें। अजन्मी हूँ मैं भाग हूँ तुम्हारा मत…