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  • इंसानी कठपुतलियाँ

    इंसानी कठपुतलियाँ

    इंसान बन रहा है कठपुतलियाँ। इंसान बन रहा है कठपुतलियाँ। जैसे कठपुतली करती है नर्तन दूसरे के इशारों पर। टिका है उसका जीवन दूसरों की उंगलियों के सहारे। साँस लेती है वो अपने शरीर पर बँधे हुए धागों से और वही करती है जो उसका मालिक करवाता है। ऐसे ही हम सब भी कठपुतलियाँ हैं…