—
by
भारत के श्रमवीरों की मैं गौरव गाथा लिखता हूँ। जो रीढ़ है देश की उनकी पीड़ा लिखता हूँ। जो हर मौसम में पीड़ा सहकर हँसकर भी जी लेते हैं। जो कभी न मुँह से कुछ मांगते घर पैदल ही चल देते हैं।। ऐसे मजदूरों की मैं गौरव गाथा लिखता हूँ। जो रीढ़ है देश की…