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आत्मनिर्भरता
निरालंब तुम रहना सीखो औरों का क्या दम भरना अपने नैया खुद हीं खेवो आत्म निर्भर जग में रहना औरों के बल पर जो बढ़ता शक्तिहीन कहलाता है जंगल में बोलो गीदड़ कब सिंहों सा आदर पाता है अपने भरोसे जीने वाले उन्नति के अधिकारी रहे जैसे जल में तूंबी रहती वैसे सब पर भारी…