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चलती साँसे
पूजा कुमारी साव इस कविता में जिंदगी और साँसों की चर्चा करती हैं। साँसें चल रही है और यह जिंदगी भी आगे बढ़ रही है। जब तक साँसे चलती है, ये सांसे गर्म होती है शरीर और मस्तिष्क, बुध्दि अभी, मैं मरा नहीं कहता है, बीमार व्यक्ति अभी साँसे, चल रही है मैं सोच, पाता…