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तुम समझती क्यों नहीं हो
आदत-सी हो गई है मुझको तेरी तुम समझती क्यों नहीं हो मिलना है हमारा बेहद जरूरी तुम समझती क्यों नहीं हो सच में तुम हो गई हो मेरी मजबूरी तुम समझती क्यों नहीं हो सर्द मौसम की गुनगुनी धूप-सी हो तुम तुम समझती क्यों नहीं हो इश्क़ हक़ीक़ी हो तुम ही मेरी तुम समझती क्यों…